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    सुलझ गया सबसे पुराना रहस्य! आखिर सूरजमुखी का फूल सूर्य की दिशा में ही क्यों रखता है मुंह


    वनस्पति जगत का एक सबसे पुराना रहस्य वैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है। यह रहस्य यह था कि आखिर सूरजमुखी का फूल सूर्य की दिशा में ही क्यों मुंह रखता है। इस रहस्य को सुलझाने पर मिले परिणाम के साथ सौर उर्जा के प्रभावी दोहन की संभावनाएं जुड़ी हैं। सूरजमुखी का नाम सुनकर अक्सर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। पीली पत्तियों और काले केंद्र वाला यह फूल कुछ ऐसा लगता है मानो सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाली कोई स्माइली हो।
    लेकिन वैज्ञानिकों के सामने यह बात पहेली बनी हुई थी कि आखिर इस पौधे के नए फूल खुद को उधर ही क्यों घुमा लेते हैं, जिस ओर सूर्य जा रहा होता है। वह यह भी जानना चाहते थे कि इससे लाभ क्या होता है? धरती पर उर्जा का एक सबसे बड़ा स्रोत कोई है तो वह है सूर्य। हाल ही में विज्ञान मंत्री हषर्वर्धन ने सौर उर्जा उत्पादन के लिए अपने घर पेड़ जैसा दिखने वाले पहले ‘सौर वृक्ष’ का उद्घाटन किया था। यह मौजूदा सरकार के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें अगले छह साल में 100 गीगावॉट सौर उर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
    सूरजमुखी द्वारा खुद को सूर्य की दिशा में घुमा लेने को ‘हीलियोट्रोपिज्म’ कहा जाता है। लेकिन यह प्रक्रिया होती कैसे है, इस बात की जानकारी अब तक नहीं थी। अब एक शीर्ष विश्वविद्यालय ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया’ में काम करने वाले छह अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक दल ने पाया है कि तने में एक दिशा में होने वाली चयनात्मक वृद्धि के कारण सूरजमुखी सूर्य की दिशा में देखता है।
    इस पौधे का अध्ययन करने वाले इस दल ने पिछले सप्ताह साइंस नामक जर्नल में अपना शोधपत्र प्रकाशित किया, जिसमें यह विस्तार से बताया गया था कि पौधे का यह अदभुत सिद्धांत काम कैसे करता है और इससे पौधे को क्या लाभ होता है। इस दल ने बताया है कि सुबह के समय फूल का चेहरा पूर्व की ओर होता है और फिर जिस दिशा में सूर्य बढ़ता जाता है, यह भी उसी दिशा में घूमता जाता है। रात के समय यह विपरीत दिशा में वापस आ जाता है ताकि सुबह एकबार फिर से इसका चेहरा सूर्य की दिशा में हो सके।  सिर्फ नए फूल ही इस लय का पालन करते हैं। जब ये बड़े हो जाते हैं और इनके बीज स्थापित हो जाते हैं तो ये फूल हमेशा के लिए अपना मुंह पूर्व की दिशा में रखता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यस्क सूरजमुखी में यह चक्र रूक जाता है। उनका मुंह हमेशा पूर्व की दिशा में रहने की वजह यह है कि इससे फूल और परागण करने वाले जीवों के बीच होने वाली प्रक्रिया में लाभ मिलता है। सूरजमुखी के व्यस्क फूलों का पूर्व से पश्चिम की ओर घूमना सर्वविदित है लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया लंबे समय से रहस्य बनी हुई थी। फिर चाहे इस व्यवहार के पीछे की वजह परासरण दाब हो या हर 24 घंटे में दोहराई जाने वाली प्रक्रिया। शोध के प्रमुख लेखक हैगोप एस एटेमियन ने सामान्य सूरजमुखी के अध्ययन में इसपर सूर्य के प्रकाश और एलईडी लाइट पड़ने में अनियमितता लाई गई।
    उदाहरण के लिए जब ग्रोथ चैंबर में इसपर उपर से लगातार प्रकाश पडता रहा तो कई दिन तक तो एक दिशा से दूसरी तक जाने की इनकी प्रक्रिया जारी रही लेकिन फिर यह चलन कम होने लगा। इससे यह पता चला कि ये पौधे 24 घंटे की एक लय के अनुरूप संचालित होते थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यस्क होते इन फूलों में पूर्व से पश्चिम की दिशा में मुड़ने की प्रक्रिया बंद हो जाने का संबंध तने की कोशिकाओं की वृद्धि से है।
    अध्ययन में पाया गया कि सूरजमुखी के बीज दोपहर की तुलना में सुबह खुद पर पड़ने वाले प्रकाश पर ज्यादा मजबूत प्रतिक्रिया देते हैं। शोधपत्र के लेखकों का कहना है कि सूर्य के प्रकाश के प्रति इस संवेदनशीलता के कारण पौधे धीरे-धीरे अपना मुंह पूरी तरह पूर्व की ओर स्थापित कर लेते हैं। शोधकर्ताओं ने गमलों में भी सूरजमुखी उगाए और इनमें से आधे पौधों को सूर्योदय के दौरान पश्चिम की ओर घुमाकर रख दिया। पूर्व की ओर मुंह किए पौधे पश्चिम की ओर मुंह किए पौधों से ज्यादा गर्म थे। ऐसे में पूर्व की ओर मुंह वाले फूल परागण करने वाले पतंगों को आकषिर्त करने में ज्यादा सक्षम थे।
    जब पश्चिम की ओर मुंह किए सूरजमुखी फूलों को हीटरों की मदद से गर्म किया गया तो वे भी परागण के लिए आने वाले जीवों को उन फूलों की तुलना में ज्यादा आकषिर्त करने लगे, जिनका मुंह पश्चिम की ओर था लेकिन उन्हें कृत्रिम रूप से गर्म नहीं किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि यह अध्ययन दिखाता है कि पूर्व या पश्चिम की ओर मुंह किए सूरजमुखियों में परागण करने वाले जीवों को आकषिर्त करने की क्षमता में तापमान का एक बड़ा योगदान है।
    इस सामान्य से शोध से कई बातें पता चली हैं। इसे करने में शोधार्थियों का लगभग ‘ना’ बराबर खर्च लगा है क्योंकि इसमें मूलत: अवलोकन करना था। बेहद सरल ढंग से डिजाइन किए गए इन प्रयोगों ने लंबे समय से चले आ रहे एक रहस्य को सुलझा दिया। कुछ अध्ययनों का कहना है कि दिनभर सूर्य की ओर से मुंह करके सूरजमुखी 10 प्रतिशत ज्यादा तेल पैदा कर सकते हैं। इसी तरह हषर्वर्धन के घर में लगा ‘सौर वृक्ष’ सूर्य के प्रकाश को ज्यादा अवशोषित करके ज्यादा बिजली बना सकता है।
    विज्ञान मंत्रालय द्वारा विकसित ‘सौर उर्जा वृक्ष’ में सौर सेलों को उर्ध्वाधर लगाया गया है। इसकी संरचना ठीक पेड़ जैसी है, जिसमें एक मुख्य तना होता है। इसमें लगे सौर पैनल बड़ी पत्तियों की तरह काम करते हैं। इस तरह इसके लिए पारंपरिक सौर फोटोवोल्टिक संरचना की तुलना में कम जमीन चाहिए होती है। इसका एक लाभ यह है कि कृषि योग्य जमीन का इस्तेमाल सौर उर्जा दोहन के लिए करने के साथ-साथ इसपर कृषि भी की जा सकती है। इस नवोन्मेष का उपयोग ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में संभव है। हषर्वर्धन ने कहा कि एक मेगावॉट सौर उर्जा उत्पादन के लिए पारंपरिक सौर पैनल की व्यवस्था के तहत लगभग 1.4 हेक्टेयर जमीन चाहिए होती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में हरित उर्जा के उत्पादन के लिए हजारों एकड़ जमीन की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि भूमि का अधिग्रहण अपने आप में एक बड़ा मुद्दा है।
    केंद्रीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेाश्क गिरीश साहनी ने भविष्य की संभावनाएं बताते हुए कहा कि ‘सौर उर्जा वृक्ष’ को एक चक्रण से जुड़े मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। मोटर संचालित प्रक्रिया के तहत यह दिन में सूर्य की गति के अनुरूप खुद को घुमा सकेगा। इस तरह यह मौजूदा क्षमता की तुलना में ज्यादा उर्जा पैदा कर सकेगा। हषर्वर्धन उम्मीद जताते हैं कि जल्दी ही पूरे भारत में सौर वृक्ष लगाए जाएंगे। भविष्य में सूर्य की ओर मुंह करने वाले सूरजमुखी भारत की उर्जा संबंधी संभावनाओं को और अधिक चमकीला बना सकते हैं।



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