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    WhatsApp पर बैन लगाने से SC का इंकार

    WhatsApp पर बैन लगाने से SC का इंकार




    देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो रहे व्हाट्सएप्प पर बैन लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि व्हाट्सएप्प संदेश का इस्तेमाल आतंकवादी कर सकते है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वो अपनी मांग केंद्र के सामने रखे। 

    दरअसल व्हाट्सएप्प पर एनक्रिप्शन सिस्टम लागू होने के बाद से दो लोगों के बीच या ग्रुप के बीच हुई बातचीत को पकड़ पाना नामुमकिन है, जिससे आतंकवादियों और अफवाह फैलाने वालों को मदद मिल रही है। इसी खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से व्हाट्सएप्प पर बैन लगाने की याचिका हरियाणा के आरटीआई कार्यकर्ता सुधीर यादव ने लगाई है।

    RTI कार्यकर्ता ने लगाई याचिका
    एक्टिविस्ट सुधीर यादव की इस याचिका में कहा गया है कि व्हाट्सएप्प ने अप्रैल से ही एनक्रिप्शन लागू किया है जिससे इस पर चैट करने वालों की बातें सुरक्षित रहती हैं और यहां तक कि सुरक्षा एजेंसियां भी इन्हें डिकोड नहीं कर सकतीं। याचिका में कहा गया है कि अगर खुद व्हाट्सएप्प भी चाहे तो वह भी इन संदेशों को उपलब्ध नहीं कर सकता। इस प्रणाली की वजह से आतंकियों और अपराधियों को संदेश के आदान-प्रदान करने में आसानी होगी और देश की सुरक्षा को खतरा होगा। याचिका में व्हाट्सएप्प के अलावा और भी एप्प का जिक्र किया गया है। 

    यह है  व्हाट्सएप्प एनक्रिप्शन
    व्हाट्सएप्प ने अप्रैल 2016 से यह यूजर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया था। इस सिस्टम की खास बात ये है कि एक बार एनक्रिप्शन सेट करने के बाद कोई भी एजेंसी और खुद व्हाट्सएप्प भी आपके और आपके व्हाट्सऐप फ्रेंडस की चैट को नहीं पढ़ सकता है। इसे शुरू करने के लिए व्हाट्सएप्प आपको हर नए चैट के साथ एनक्रिप्ट करने का मैसेज भेजता है।

    एनक्रिप्शन से क्या है खतरा
    यूजर की दृष्टि से देखा जाए तो एनक्रिप्शन सिस्टम उनकी निजता की रक्षा करता है। लेकिन इस बात की भी पूरी संभावना होती है कि आतंवादी गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए यह एक सबसे सुरक्षित और गोपनीय नेटवर्क साबित होता है। इसके जरिए किसी भी तरह की आतंकी प्लानिंग और सूचनाएं आदान-प्रदान की जा सकती हैं। क्योंकि उनको पता है कि उनकी सीक्रेट चैट को कोई भी डिकोड नहीं कर पाएगा।


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