पिछले वर्ष मैंने ई-बुक्स के विषय में लिखा था कि कैसे आखिरकार कागज़ पर छपी किताबों का त्याग कर मैंने ई-बुक्स को अपनाया। उस समय कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था, सिर्फ़ ऐमैज़ॉन (Amazon) का किण्डल (Kindle) ही ढंग का उपाय था। लेकिन किण्डल डिवाइस की जगह मैंने एण्ड्रॉय्ड टैबलेट को तरजीह दी, आखिर ऐमैज़ॉन किण्डल सॉफ़्टवेयर विण्डोज़ (Windows), मैक (Mac), एण्ड्रॉय्ड (Android), विण्डोज़ फोन (Windows Phone), आईफोन (iPhone), आईपैड (iPad) आदि सभी के लिए उपलब्ध है।
अब एक वर्ष बाद कुछ अन्य खिलाड़ी भी मैदान में हैं। कुछ समय पहले फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने अपनी ई-बुक बाज़ार में निकाल दी। फ्लिपकार्ट की शुरुआत किताबें बेचने से ही हुई थी और धीरे-२ इसने अन्य उत्पाद बेचने शुरु किए, इसलिए ई-बुक्स के आने की महज़ प्रतीक्षा थी कि कब फ्लिपकार्ट इनको बेचना आरंभ करता है। परन्तु एक थर्ड पार्टी विक्रेता होते हुए भी इसकी ई-बुक्स फिलहाल सिर्फ़ एण्ड्रॉय्ड पर पढ़ी जा सकती हैं क्योंकि इसका ई-बुक रीडर एप्प सिर्फ़ उसी के लिए उपलब्ध है। :tdown: तो यदि आप किसी अन्य मोबाइल डिवाइस अथवा कंप्यूटर पर पढ़ने के इच्छुक हैं तो यह आपके किसी काम की नहीं। फिर एक समस्या यह भी है कि इसका कलेक्शन अभी काफ़ी कम है, अधिक किताबें नहीं हैं। कई नई और लोकप्रिय किताबें भी ई-बुक में उपलब्ध नहीं हैं हालांकि उन्हीं के छपे हुए संस्करण फ्लिपकार्ट बेच रहा है। यदि दाम की बात करें तो इसके दाम ऐमैज़ॉन से थोड़े अधिक हैं, ज़्यादा नहीं पर कुछ फर्क है।
एक अन्य खिलाड़ी जो मैदान में उतरा है वह है गूगल। गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) में ई-बुक्स आदि काफ़ी समय से बिक रही हैं परन्तु भारत का रूख इसने अभी एकाध सप्ताह पूर्व ही किया है। एण्ड्रॉय्ड निर्माता होने के बावजूद गूगल प्ले स्टोर से खरीदी हुई ई-बुक्स न सिर्फ़ एण्ड्रॉय्ड पर पढ़ी जा सकती है वरन्‌ इनको कंप्यूटर और आईफोन/आईपैड पर भी पढ़ा जा सकता है। इसके अतिरिक्त गूगल कुछ ई-बुक रीडर डिवाइस का भी समर्थन देता है जैसे सोनी ई-रीडर (Sony eReader), कोबो (Kobo), नुक (Nook) इत्यादि। इसके अतिरिक्त कुछ ई-बुक्स को आप ईपब (ePub) अथवा पीडीएफ़ (PDF) रूप में डाऊनलोड भी कर सकते हैं। :tup:
परन्तु ऑल इज़ नॉट रोज़ी विद गूगल प्ले स्टोर। दो मुख्य समस्याएँ हैं जिनके चलते फिलहाल इसको अपनाना कठिन है। गूगल प्ले स्टोर पर किताबों के दाम ऐमैज़ॉन किण्डल स्टोर के मुकाबले काफ़ी अधिक हैं, कई मामलों में दोगुने या अधिक भी हैं। :tdown:
उदाहरण के लिए अभी कुछ दिन पहले आया अमिष त्रिपाठी का नवीनतम उपन्यास – द ओथ ऑफ़ द वायुपुत्रास (The Oath of the Vayuputras) – ऐमैज़ॉन किण्डल स्टोर पर 176 रूपए का मिल रहा है और वही गूगल प्ले स्टोर पर 189 रूपए का मिल रहा है।

कोई खास फ़र्क नहीं है, मात्र तेरह रूपए की बात है, नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। परन्तु मैंने कई किताबों में यह फ़र्क काफ़ी ज़्यादा भी देखा है। एक अन्य उदाहरण के लिए जे.आर.आर. टोलकिन (लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स वाले लेखक) का लगभग 76 वर्ष पुराना उपन्यास – द हॉब्बिट (The Hobbit) – ऐमैज़ॉन किण्डल स्टोर पर 152 रूपए का मिल रहा है और वही गूगल प्ले स्टोर पर 303 रूपए का मिल रहा है। :tdown:

यह फ़र्क काफ़ी अधिक है और नज़रअंदाज़ करने योग्य नहीं है। इसके अतिरिक्त गूगल प्ले स्टोर में भी कोई बहुत बड़ा कलेक्शन नहीं है। उसमें कई किताबें हैं जो भारत के खरीददारों को उपलब्ध नहीं हैं हालांकि ऐमैज़ॉन किण्डल स्टोर में वही किताबें आराम से मिल रही हैं, बिंदास खरीदो और पढ़ो।
मेरे अनुसार गूगल प्ले स्टोर ऐमैज़ॉन किण्डल स्टोर को टक्कर दे सकता है लेकिन अभी समय लगेगा। एक तो गूगल को दाम सुधारने पड़ेंगे, उसके बिना बात नहीं बनेगी। इसके लिए प्रकाशकों के साथ गूगल को कदाचित्‌ ऐमैज़ॉन वाला रवैया अपनाना होगा। :twisted: दूसरे, कलेक्शन का विस्तार करना होगा, अन्यथा अभी ऐमैज़ॉन से टक्कर ले सकने योग्य कहीं भी नहीं है।
ई-बुक्स का चलन धीरे-२ बढ़ रहा है, एण्ड्रॉय्ड तथा आईओएस आदि टैबलेट आ जाने से प्रयोग और सुगम हुआ है। अब एक अलग डिवाइस नहीं लेनी पड़ती, एक टैबलेट में ही सब कार्य हो जाते हैं चाहे वह ईमेल अथवा नेट सर्फ़िंग हो या चैट अथवा गेमिंग या फिर किताबें पढ़ना। एक डिजिटल कन्ज़्यूमर के लिए उत्तम कन्वर्जेन्स (convergence)। :tup:
पहले जहाँ बरिस्ता आदि में किताब पढ़ते कई लोग मिल जाते थे परन्तु ई-बुक पढ़ता कोई न दिखता था वहीं आजकल एकाध लोग दिख जाते हैं टैबलेट अथवा ई-बुक रीडर पर पढ़ते हुए। मेरा मानना है कि समय के साथ यह चलन और बढ़ेगा तथा और अधिक लोग ई-बुक्स को अपनाएँगे। :tup:
 
आप किस तरह की किताबें पढ़ते हैं? कागज़ पर छपी हुई या ई-बुक? यदि ई-बुक पढ़ते हैं तो पसंदीदा औज़ार क्या है, ई-बुक रीडर या टैबलेट? और यदि कागज़ पर छपी हुई पढ़ते हैं तो ई-बुक्स अपनाने के विषय में आपके क्या विचार हैं?